यू जी सी

परिचय : –

यू जी सी भारत का विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (अंग्रेज़ी:University Grants Commission, लघु:UGC) केन्द्रीय सरकार का एक आयोग है जो विश्वविद्यालयों को मान्यता देता है। यही आयोग सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को अनुदान भी प्रदान करता है।

अर्थ : – 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यू जी सी इसका अंग्रेजी नाम है यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन है ।

इतिहास : –

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 28 दिसंबर, 1953 को अस्तित्व में आया और विश्वविद्यालय में शिक्षण, परीक्षा और अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण और रखरखाव के लिए 1956 में संसद के एक अधिनियम द्वारा भारत सरकार का एक संवैधानिकं  संगठन बनाया  गया जिसका कार्य शिक्षा की गुणवक्ता को निर्धारित करना व उसके संबंध में मानक तैयार करना एवं उस मानक को लागू करवाना ।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यू जी सी का गठन स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सारजेट समिति की सिफारिशों का ऑनलाइन जाना है | समय 1944 में इसका प्रस्ताव दिया था एवं 1945 में इस समिति का गठन किया गया, लेकिन उस समय दिल्ली वाराणसी और अलीगढ़ विश्वविद्यालय तक ही सीमित था | इसके पश्चात 1947 में भारत के विश्वविद्यालय नियंत्रित करना आरंभ किया । 1948 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग को परिवर्तित करके विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रस्ताव दिया | विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यू जी सी की स्थापना 28 दिसंबर 1953 की तारीख शिक्षा मंत्री  मौलाना अबुल कलाम ने की थी यूजीसी को बाद में 1956 के तहत संवैधानिक दर्जा दिया गया। भारत में संविधान निर्माण के समय इस आयोग का कोई भी जिक्र नहीं था 1 संविधान संशोधन के द्वारा इसको एक संवैधानिक संस्थान का दर्जा दिया गया है

मुख्य कार्यालय :-

यू जी सी का मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में स्थापित है ।

सहायक कार्यालय :-

यू जी सी के मुख्य कार्यालय के अलावा अन्य 6 कार्यालय भी हैं जो बेंगलुरु, पुणे, भोपाल,  कोलकाता, हैदराबाद, गुवहाटी में है ।

अध्यक्ष :-

M. जगदीश कुमार फरवरी 2022 से वर्तमान समय तक अपनी सेवाएं दे रहे हैं

यू जी सी

Table of Contents

website : –

ugc.ac.in

क्षेत्र : –

उच्च शिक्षा

कार्य : –

संपूर्ण भारत

प्रथम एक्जक्यूटिव : –

शांति स्वरूप भटनागर

समिति के सदस्य : –

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (Uयू जी सी) के संगठन की हम बात करें तो इस आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और साथ ही 10 अन्य सदस्यों को  संगठन में सम्मिलित किया जाता हैं। इन 10 सदस्यों में कृषि,उद्योग,कानून एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े सदस्यों को सम्मिलित किया जाता हैं |अपने क्षेत्र में विशेष ज्ञान विशेष कार्य के चलते इनको इस समिति का सदस्य बनाया जाता है ।

यू जी सी द्वारा मान्यता प्राप्त है विद्यालय की संख्या : –

वर्तमान समय में 911 विश्वविद्यालय मंजूरी दी गई है जिसमें से 400 राज्य विश्वविद्यालय 126 डीम्ड यूनिवर्सिटी 48 केंद्र सरकार विश्वविद्यालय 3 3 7 निजी विश्वविद्यालय है ।

आयोग के सदस्य :-

1956 में जब इस आयोग यू जी सी का गठन किया गया तो कुछ समय आयोग के मुख्य सलाहकार के रूप में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन एवंमौलाना आजाद जैसे गणमान्य व शिक्षाविद शामिल थे |

कार्य : –

Net परीक्षा का आयोजन : – 

यह आयोग यू जी सी राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (National Eligibility Test / NET) का भी आयोजन करता है जिसे उत्तीर्ण करने के आधार पर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति होती है।

छूट : –

सन 2006 से ऐसी व्यवस्था लागू है की एम फिल वा पी एचडी धारक व्यक्ति भी स्नातक स्तरं पर पढाने के योग्य होगा ।

सहायक :-

यूजीसी के कार्य को आसान बनाने केलिए कुछ सहायक संस्थान निम्नवत है :- –

यूजीसी में कुल 16 कॉलेज और शिक्षण संस्थान शामिल हैं। यह व्यावसायिक परिषदें पाठ्यक्रमों की मान्यता, व्यावसायिक संस्थानों को बढ़ावा देने और स्नातक कार्यक्रमों और विभिन्न पुरस्कारों को अनुदान प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं। वैधानिक पेशेवर परिषदें हैं:

अखिल भारतीय तंत्र शिक्षा परिषद – अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई)

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई)

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)

ग्रामीण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय परिषद (एनसीआरआई)

इंडियन डेंटल काउंसिल – डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई)

पुनर्वास परिषद (आरसी)

वास्तुकला परिषद (सीए)

फ़ार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया – फ़ार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया (PCI)

दूरस्थ शिक्षा परिषद (डीईसी)

राज्य उच्च शिक्षा परिषद (SCHE)

भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई)

सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम)

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई)

सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी (CCH)

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई)

भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी)

AICTE :-

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना एआईसीटीई अधिनियम, 1987 के तहत की गई है। परिषद तकनीकी शिक्षा के समन्वित और एकीकृत विकास को सुनिश्चित करने और मानकों के रखरखाव के लिए उपयुक्त सभी कदम उठाने के लिए अधिकृत है। परिषद, अन्य बातों के अलावा: देश में सभी स्तरों पर तकनीकी शिक्षा के विकास का समन्वय करना; तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों के लिए उपयुक्त प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना, जवाबदेही को लागू करने के लिए मानदंडों और तंत्रों को शामिल करना;पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम, भौतिक और निर्देशात्मक सुविधाओं, स्टाफ पैटर्न, स्टाफ योग्यता, गुणवत्ता निर्देश, मूल्यांकन और परीक्षाओं के लिए निर्धारित मानदंड और मानक; संबंधित एजेंसियों के परामर्श से नए तकनीकी संस्थान शुरू करने और नए पाठ्यक्रम या कार्यक्रम शुरू करने के लिए अनुमोदन प्रदान करना।

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई)

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद देश में शिक्षक शिक्षा प्रणाली के नियोजित और समन्वित विकास की सुविधा के लिए और शिक्षक में मानदंडों और मानकों के विनियमन और उचित रखरखाव के लिए राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। शिक्षा व्यवस्था। एनसीटीई को दिया गया जनादेश बहुत व्यापक है और इसमें शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जिसमें स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक चरणों में पढ़ाने के लिए व्यक्तियों के अनुसंधान और प्रशिक्षण और अनौपचारिक शिक्षा शामिल है। अंशकालिक शिक्षा, वयस्क शिक्षा और दूरस्थ (पत्राचार) शिक्षा पाठ्यक्रम। धारा 12 के तहत परिषद निम्नलिखित गतिविधियों और कार्यों के लिए जिम्मेदार माना गया है ।

देश में शिक्षक शिक्षा और उसके विकास का समन्वय और निगरानी करना;

किसी व्यक्ति को शिक्षक के रूप में नियोजित करने के लिए न्यूनतम योग्यता के संबंध में दिशानिर्देश निर्धारित करना;

शिक्षक शिक्षा में किसी विशिष्ट श्रेणी के पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण के लिए मानदंड निर्धारित करना;

नए पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण शुरू करने के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा अनुपालन के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करना;

परीक्षाओं के संबंध में मानक निर्धारित करना, जिससे शिक्षक शिक्षा योग्यताएं प्राप्त हों; और

परिषद द्वारा निर्धारित मानदंडों, दिशानिर्देशों और मानकों के कार्यान्वयन की समय-समय पर जांच और समीक्षा करना।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया : –

इसको अधिवक्ता अधिनियम 1961 के तहत अपने कार्यों के निर्वहन के लिए नियम बनाने का अधिकार है। एक महत्वपूर्ण नियम बनाने की शक्ति अधिवक्ताओं द्वारा देखे जाने वाले पेशेवर आचरण और शिष्टाचार के मानकों के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने के संदर्भ में है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम अधिवक्ता के रूप में नामांकित होने के हकदार व्यक्ति के वर्ग या श्रेणी के लिए निर्धारित कर सकते हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया उन शर्तों को भी निर्दिष्ट कर सकता है जिनके अधीन एक वकील को अभ्यास करने का अधिकार होना चाहिए और जिन परिस्थितियों में एक व्यक्ति को अदालत में एक वकील के रूप में अभ्यास करने के लिए समझा जाना चाहिए।

ग्रामीण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय परिषद : – 

ग्रामीण संस्थानों की राष्ट्रीय परिषद एक स्वायत्त समाज है जो पूरी तरह से मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है। भारत की। 19 अक्टूबर, 1995 को हैदराबाद में अपने मुख्यालय के साथ पंजीकृत, यह महात्मा गांधीजी की नई तालीम की क्रांतिकारी अवधारणा की तर्ज पर ग्रामीण आजीविका को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के मुख्य उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया था, जो एक कार्यात्मक शिक्षा पर आधारित है। गांधीजी द्वारा प्रस्तावित मूल्य। परिषद के अन्य उद्देश्यों में अन्य शैक्षणिक संस्थानों और स्वैच्छिक एजेंसियों को गांधीवादी दर्शन के अनुसार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के अलावा यू जी सी, एआईसीटीई और सीएसआईआर, एआईसीटीई आदि जैसे अनुसंधान संगठनों के साथ नेटवर्किंग द्वारा शिक्षक प्रशिक्षण, विस्तार और अनुसंधान शामिल हैं।

यू जी सी के कार्य : –

संपूर्ण भारत में विश्वविद्यालय की स्थापना करना :- –

यू जी सी सुनिश्चित करता है कि संपूर्ण भारत में स्नातक स्तर या उससे उच्च स्तर के विश्वविद्यालय एवं तकनीकी संस्थान की उपलब्धता संपूर्ण भारत में प्रचुरता से हो इस प्रयास द्वारा  शिक्षा के स्तर को उठाने का प्रयास किया जाता है ।

विश्व विद्यालयों को मान्यता प्रदान करना

यू जी सी विजय सुनिश्चित करता है कि शिक्षा के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाने वाले जो नए संस्थान खोले जा रहे हैं उनकी गुणवत्ता की जांच करना एवं उन संस्थानों को दिशा निर्देश देने के साथ-साथ संस्थानों को मान्यता प्रदान करना जिससे उनके द्वारा यह जाए शैक्षणिक कार्यों पर रचना लग सके एवं उनसे अध्ययन करने वाले बच्चों को एक बेहतर रिजल्ट व कैरियर मिल सके ।

फर्जी यूनिवर्सिटी को रोकना  : –

समय-समय पर यू जी सी अपने द्वारा अप्रूवड एवं अनअप्रूव्ड विश्वविद्यालयों की सूची जारी करता रहता है क्योंकि यूजीसी की अनदेखी के कारण कभी कभी ऐसी खबर जहां अनेक विश्वविद्यालय जो यू जी सी से मान्यता प्राप्त नहीं है उनके द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और उसके संबंध में वह डिग्रियां भी बांट रहे हैं ऐसे  में उन बालकों या छात्रों को दी गई डिग्री या किसी काम की नहीं होती और उनके समय में पैसे का नुकसान होता है अपने कार्यक्रमों के द्वारा ऐसे विद्यालयों को बंद करवाने  पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का कार्य भी प्रमुखता से करती है क्योंकि इससे यू जी सी की छवि खराब होती है

नेट परीक्षा का आयोजन करना : –

यू जी सी का प्रमुख कार्य नेट परीक्षा का आयोजन करना होता है जो वर्ष में दो बार होती है परीक्षा का आयोजन के उपरांत प्रतिभागियों को उनके रिजल्ट प्रमाण पत्र जारी करना जिससे वह आगे आने वाली स्नातक अध्यापक पात्रता यह तो स्वयं को उपलब्ध करा सके ।

शिक्षकों के कल्याण पर ध्यान देना : –

शिक्षकों के कल्याण के दिखाए जाएं यू जी सीनेट आयोग में ऐसे बहुत से क्रियाओं को सम्मिलित किया है जिससे शिक्षक का जीत सुनिश्चित हो सके जैसे अध्यापकों के लिए नए वेतनमान का निर्धारण करना उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए विभिन्न नेताओं को केंद्र सरकार व राज्य सरकार को सुझावों को प्रेषित करना ।

गुणवत्ता का विकास करना : –

यू जी सी अपने अन्य सहायक 16 संस्थानों के द्वारा इस . बात को सुनिश्चित करता है कि वर्तमान में चल रहे कार्यक्रम व पाठ्यक्रम की गुणवत्ता को परखना एवं भविष्य में उन्हें और किस तरह से अच्छा किया जा सकता है इसके क्षेत्र में कार्य करना एवं सहायकों के निर्देश और सुझाव की परख करना उन्हें पलना करवाना होता है ।

दी जाने वाली सुविधाएं की तैयारी के संबंध में :

सर्वे एवं सहायक कर्मचारियों के दौरान से यह पता लगाने का प्रयास करती है कि यू जी सी संस्थान अपनी  गुणवत्ता के साथ कार्य कर रहे हैं अथवा नहीं शिक्षकों व छात्रों को दी जाने वाली सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही है या नहीं ।

सलाह देना : –

यू जी सी का एक प्रमुख कार्य विश्वविद्यालय में चल रहे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उपायों केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों को इस बात के लिए निर्देशित करना कि किन कार्यों से शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है ।

मानकों पर काम करना : –

यू जी सी इस बात पर बल देता है कि शिक्षा के न्यूनतम मानकों पर शिक्षा को किस उच्चतम स्तर पर पहुंचा जा सकता है कम से कम शर्तों पर शिक्षा का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार वह उपयोग किया जाना है यह इस बात पर भी बल देता है कि शिक्षा के लिए उपयोगी मानक जो बनाए गए हैं उनकी फोड़ते सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाए जैसे भगवान अध्यापक पदाधिकारी व अन्य वातावरण संबंधी वस्तुये ।

शिक्षकों का आमंत्रण : –

यू जी सी इस बात पर बल देता है कि किसी एक विश्वविद्यालय का अध्यापक किसी दूसरे विश्वविद्यालय में जाकर अल्पकाल के लिए अपने अनुभव योग्यता एवं विजेता से वहां के छात्रों लाभान्वित करने का मौका प्रदान करें इस बात के लिए यू जी सी विश्वविद्यालयों को आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है जिससे विश्वविद्यालय या संस्थान किसी अन्य अध्यापक को बुलाने का प्रबंध कर सकते हैं ।

अवकाश प्राप्त शिक्षकों की युवाओं को संगठित करना :

शिक्षा को विकसित करने की दृष्टि से यू जी सी ने अवकाश प्राप्त शिक्षकों को एक योजना संगठित करता है जिससे उनकी सेवाएं का लाभ शिक्षा के क्षेत्र में उनके अवकाश के बाद भी प्राप्त किया जा सके ऐसे शिक्षक शिक्षा से संबंधित कार्यों में शोध के लिए 6000 रुपए प्रति वार्षिक कंपन सेट करती है तथा शोध कार्य में आने जाने के लिए जो भी यात्रा भत्ता होता है एवं रहने की सुविधाओं का प्रबंध करता है ।

छात्रवृत्ति की व्यवस्था करना :-

विभिन्न क्षेत्रों में अनेक लोग विद्यार्थी होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती है ऐसे विद्यार्थियों के लिए शोध कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए यू जी सी छात्रवृत्ति प्रदान करता है साथियों के साथ साथ उन्हें विदेश में रिचार्ज करने वैज्ञानिक उपकरण प्रदान करती हैं ।

परीक्षा प्रणाली में सुधार करना : –

परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए यू जी सी हमेशा प्रयत्नशील रहा है1965 1966 मैं एक कमेटी का गठन किया गया इसका प्रमुख देश है परीक्षा प्रणाली में व्याप्त दोषों का पता लगाना और उसके संबंध में संस्थान को अवगत कराना जिससे व्याप्त दोषों को दूर कर उन्हें व्यापक अवस्था में लाया जा सके ।

शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय करण : –

यू जी सी इस बात पर बल देता है कि भारत में प्रदान की जा रही शिक्षा से प्राप्त छात्र जब अपने आप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाए तो वहां उसे समुचित दशाओं का ज्ञान हो जिससे बड़ा अपने आप को सिर्फ भारत में ही नहीं वरन संपूर्ण राष्ट्र में व्यक्त कर सकें वह अपने रोजगार सेवक की तलाश कर उसमें कुशलता हासिल कर पाए |

यू जी सी का महत्वपूर्ण उद्देश्य

यू जी सी भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए काम करता है। इसके मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

यू जी सी का पहला महत्वपूर्ण उद्देश्य देश के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षण, परीक्षा और शोध की निगरानी करना है।

यू जी सी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों के हित में आवश्यकता पड़ने पर नए नियम बनाना और लागू करना है।

इसके बारे में उच्च दंड और मार्गदर्शन प्रदान करना।

शिक्षण पद्धति में सुधार और नए समाधानों को लागू करना।

शिक्षा और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखना।

इसके अलावा विश्वविद्यालयों की आर्थिक समस्याओं का समाधान करना है।

अन्य विषयों के शोध और अध्ययन के लिए शिक्षकों को अनुदान।

विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यशालाओं, सेमिनारों, अनुसंधान, प्रशिक्षण आदि के लिए सुविधाएं प्रदान करना।

आवश्यकता : –

यू जी सी का गठन पहली बार 1945 में अलीगढ़, बनारस और दिल्ली के तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के काम की देखरेख के लिए किया गया था। 1947 में सभी भारतीय विश्वविद्यालयों को कवर करने के लिए इसकी जिम्मेदारी बढ़ा दी गई ।

वर्तमान संसोधन अथवा आदेश : –

दो दिग्री एक साथ की वैधता :-

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू जी सी) के सचिव रजनीश कुमार  ने देश के करोड़ों छात्रों के संबंध में बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत छात्र जल्द ही एक साथ दो डिग्री कोर्स कर सकेंगे। हाल में हुई आयोग की एक बैठक में यू जी सी ने एक साथ दो डिग्री के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका मतलब छात्र एक सत्र में एक साथ दो डिग्री कोर्स कर सकते हैं लेकिन इसमें से एक कोर्स नियमित सिलेबस के तहत होगा, तो दूसरा कोर्स डिस्टेंट लर्निग के जरिये किया जा सकेगा. इसमे यहा कोई बाध्यता नही है। कि कौन कोर्स किरन माध्यम से किया जायेगा | इससे पूर्व भी ऐसा प्रयास किया गया था लेकिन वह सफल नही रहा था।

डिग्री या अवार्ड  प्रदान करने के संबंध में :-

सचिव रजनीश कुमार ने बताया कि शिकायत आरटीआई इस बात के लिए लगाई जाती थी छात्रों द्वाराकिए जा रहे हैं कोर्स की डिग्री को 180 दिनों के भीतर विश्वविद्यालय या संस्थान को उस छात्र को उपलब्ध कराना होगा जिस तारीख से उसने कोर्स का परिणाम प्राप्त किया हो यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो विश्व विद्यालय संस्थान के संबंध में कार्यवाही की जाएगी ।

योग दिवस के संबंध में : –

सचिव रजनीश कुमार ने 21 जून को विश्व योग दिवस के अवसर पर सभी कॉलेज विश्वविद्यालय कोई निर्देश दिया है कि 21 जून सुबह 7:00 बजे योग कार्यशाला का आयोजन किया जाए आगे आने वाले 15 दिनों तक या प्रक्रिया चलेगी और कॉलेज या विश्वविद्यालय इस बात की पुष्टि करें सभी छात्र छात्राओं को योग के संदर्भ में प्रयोग होने वाली वस्तुए चटाई चार्ट एवं अध्यापक की व्यवस्था करवाएं ।

प्रवेश परीक्षा के संबंध में : –

रजनीश कुमार ने बताया कि वर्तमान में 2022 की स्नातक प्रवेश परीक्षा में हिंदी , उड़िया तमिल कन्नड़ मलयालम उर्दू असमिया , बांग्ला जैसी  13 भाषाओं को शामिल किया जाए एवं की आवश्यकता हो तो वह उस स्थान की क्षेत्रीय भाषा को अभी प्रयोग में लाया जा सकते हैं

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निम्नलिखित कर्तव्य है : –

यू जी सीविश्वविद्यालय में से उनकी परीक्षा पाठ्यक्रम शोध आदि के  संबंध में सूचना प्राप्त करता है ।

केंद्र सरकार एवं विश्व विद्यालय में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना और उसकी समस्याओं का समाधान करना । विश्वविद्यालय में शिक्षा के सुधार एवं उसके शिक्षण स्तर को उठाने के लिए विश्वविद्यालय को सलाह देना ।

विश्वविद्यालय के शिक्षा के विस्तार एवं विकास से संबंधित कार्यों को संपन्न करवाना ।

विश्वविद्यालयों द्वारा अनेक प्रकार के सेवाएं प्रदान की जाती हैं इनके संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अपनी सलाह देना ।

नए विद्यालयों की स्थापना एवं पुराने विश्वविद्यालय के कार्य क्षेत्रों को बढ़ाना एवं इस संबंध में अपना विचार व्यक्त करना ।

विश्वविद्यालयों को अपने खजाने से दिए जाने वाले धन का वितरण करना एवं इस संबंध में अपनी नीति का निर्धारण करना ।

भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा के स्तर में समन्वय बनाए रखने और विश्वविद्यालय शिक्षा से संबंधित समस्याओं पर एक विशेष संस्था के रूप में केंद्रीय सरकार को सलाह देना ।

यू जी सी की आलोचना :-

यू जी सी जहां अपने कार्य क्षेत्र में अच्छा कर रहा है वहीं पर अमूलचूल  घटनाओं के चलते इसे आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है क्योंकि किसी भी बिंदु पर पक्ष व विपक्ष  होते हैं इसके विपरीत आवाज उठना सामान्य बात है

समान काम असमान वेतन :- 

अनेक विद्यालय महाविद्यालय में कार्य करने वाले अध्यापक जिनके कार्य करने का समय एवं अवधि समान होती है फिर भी अनेक संस्थानों द्वारा उनके इस कार्य के लिए उन्हें असमान वेतन एवं मैनेजमेंट की मर्जी का सामना करना पड़ता हैरानहिंदी की को चाहिए इस संदर्भ में कुछ गाइडलाइन बनाएं जिससे महाविद्यालय में पढ़ाने वाली अध्यापकों का सुनिश्चित किया जा सके ।

प्रवक्ता पद के लिए न्यूनतम योग्यता मैं बदलाव : –

विश्वविद्यालय महाविद्यालय में प्रवक्ताओं की भर्ती हेतु न्यूनतम योग्यता यू जी सी द्वारा ही तय की जाती है कि यूजीसी समय-समय पर इसमें बदलाव करती रहती है कभी पीएचडी कभी एमफिल एवं कभी पीएचडी के साथ नेट भी आवश्यक कर दिया जाता है समय-समय पर इन बदलावों के कारण जो युवक किसी विशेष कार्यक्रम के तहत प्रवक्ता बनने के सपने रखते हैं और यदि भर्ती के वक्त उनमें परिवर्तन संशोधन कर लिया जाता है तो विद्यार्थियों की समय पैसा दोनों बर्बाद होते हैं इस कारण भी यूजीसी समय-समय पर आलोचनाओं का पात्र रहा है ।

शुल्क में असमानता :

देशभर में कार्य कर रहे हैं सभी विद्यालय एवं महाविद्यालय की बागडोर यू जी सी के हाथ में ही होती हैं अतः देश में अनेकों महाविद्यालय जो समान पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग फीस चार्ज करते हैं क्योंकि सभी का मुखिया या देखरेख करता यू जी सी होता है महाविद्यालयों की मनमानी पर शिकंजा कसा जाय  एवं  विद्यार्थियों में रोष एवं असंतोष को समाप्त करने का कष्ट करें ।

निजी विश्वविद्यालयों के डिग्रियों की मान्यता में अंतर : –

देश में कार्यरत कुछ प्राइवेट महाविद्यालय डिग्री कॉलेज जो यू जी सी से अपलोड होते हैं जिनकी फीस सरकारी संस्थानों  से काफी महंगी होती हैं इसके बावजूद विद्यार्थी इसमें शिक्षण प्राप्त करते हैं परंतु सरकार इस बात से मना करती है कि इन संस्थानों की डिग्रीयां मान्य नहीं होगी अथवां सरकारी संस्थानों की डिग्रियों वाले बच्चों को प्रमुखता दी जाएगी इस समय इन छात्रों के समय व पैसे का नुकसान होता है यूजीसी को चाहिए अनेकों महाविद्यालय जो कि प्राइवेट हैं इनकी भी डिग्रियों को समानता  दी जानी चाहिए ।

यू जी सी का स्थानापन्न:-

समय-समय आलोचको  के द्वारा  मांग उठती रही है कि इसी के आधार पर कोई दूसरा निकाय स्थापित किया जाए जो उसके दोषो को दूर कर सके एवं इसके आदर्शो  को स्थापित कर सकें परंतु अनेक समितियों द्वारा इस बात पर सहमति नहीं बनी यही यही कारण है कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यू जी सी का सर्वमान्य करो देखने को मिल रहा है

निष्कर्ष : –

भारत में चल रहे शिक्षण संस्थानों के संबंध में यू जी सी को सभी का निर्देशन करता है नियमों का अनुपालन करवाता है एवं शिक्षण संबंधी छात्र एवं सभी क्रियाएं अपने दिशा निर्देशन में करवाता है समय-समय पर उनमें संशोधन उनकी गतिविधियों में परिवर्तन एवं यह सभी क्रियाएं जो भविष्य में अच्छे भविष्य का परिचायक हैं उनका क्रियान्वयन करती है यूजीसी समय-समय पर यह दिशानिर्देश भी जारी कर दी है कि यदि कोई भी यूनिवर्सिटी अथवा कॉलेज में शिक्षण लेने जा रहा हो तो उसे चाहिए कि वह अपने समय व पैसे की बचत उपयोग से बचने के लिए यूजीसी की वेबसाइट पर जाकर समस्त जानकारियां हासिल करें वह संस्थान की सत्यता आयोग से अनुमोदित होने की पुष्टि करें इससे भविष्य में होने वाली असुविधाओं से बचा जा सके केंद्र सरकार राज्य सरकार और विद्यालयों के बीच में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता है  बच्चों का विदेशों में शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का खयाल रखा है यह शिक्षा के सभी मांगों पर खरा उतरने का प्रयास करता है समय-समय पर कुछ गतिविधियों के कारण आलोचना का शिकार होना पड़ता है । अतः यह कहां जा सकता है कि दोषो की तुलना में गुणवत्ता की अधिकता है। I

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